Satyanidhi – Treasure of Truth

One day, Guru ji was teaching his shishya about the Muktrajya of Bhagwan. He said, “If an acharya in any sampraday becomes a seven in the Muktrajya, he keeps new and old nidhi in his khajaana. Mutlub, the acharya can understand the siddhant in any sampraday. The acharya keeps the new and old siddhanta which is satya. He doesn’t keep old asatya siddhanta which is impure nidhi and he changes some old siddhanta into 24 carat satyanidhi.

एक दिन, गुरु जी भगवान के मुक्तिराज्या के बारे में अपनी शिष्य को पढ़ा रहे थे. उन्होंने कहा, अगर किसी भी संप्रदाय में एक आचार्य मुक्तिराज्या में एक सेवक बन जाता है, तो वह अपने खजाना में नए और पुरानी निधि रखता है. मुतुल, आचार् प्रत्येक संप्रदाय में हर सिद्धांत समझ सकता है. आचार्य नए और पुरानी सत्य सिद्धांत रखता है, वह पुरानी असत्य सिद्धान्त नहीं रखता है जो अशुद्ध निधि है और वह कुछ पुराना सिद्धांत को 24 कैरेट सत्यनिधि में बदल देती है.

Hits: 7