Serve the Poor

Guru ji traveled from village to village. He always said, “Turn from your avidya because the Muktrajya of Bhagwan is near.” A brahmachari whose father was a member of the panchayat said, “Guru ji, I have studied the dharma of my family.” Guru ji said, “That is fine, follow my example and serve the poor and you will enter the Muktrajya.” The brahmachari was ashamed and walked away.

Prarthna

Oh, my swargya Pita |

I want your Muktrajya to come ||

to every jati and every jamaat |

to every dharma and every sanskriti ||

Tethastu

गुरु जी मुक्तिदात्ता अभ्यक्ति गांव से गांव गए थे. उसने हमेशा कहा “अपने अवविद्या से मुड़ें क्योंकि भगवान का मुक्तिराज्य निकट है. एक ब्रह्मचारी जिसका पिता पंचायत के सदस्य थे, ने कहा, “गुरु जी, मैंने अपने परिवार के धर्म का अध्ययन किया है।” गुरु जी ने कहा, “यह ठीक है, मेरे उदाहरण का पालन करें और गरीबों की सेवा करें और आप मुक्तिराज्य में प्रवेश करेंगे” ब्रह्मचारी शर्मिंदा था और चले गए.

પ્રાર્થના

ओह, मेरा स्वर्ग पिटा |

मैं चाहता हूं कि आपका मुक्तिराज्य आ जाए ||

हर जाति और हर जमात के लिए |

हर धर्म और हर संस्कार के लिए ||

तथास्तु

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