Not understanding puri mukti

After telling his dhoot mandal about his death and punar jeevan, Guru ji Muktidatta went to the mandir in Shantidham. People were saying, Guru ji, Give us swargya mukti.
But, Guru ji Muktidatta was crying. He said, 
You do not understand puri mukti |
You do not understand how I will give you puri mukti. ||


अपनी मृत्यु और पुनर्जीवन के बारे में अपने धूत मंडल को बताने के बाद, गुरु जी मुक्तिदत्त शांतिधाम के मंदिर गए। लोग कह रहे थे, गुरु जी, हमें स्वर्गीय मुक्ती दे दो। लेकिन, गुरु जी मुक्तिदत्त रो रहे थे।
आप पुरी मुक्ती को नहीं समझते।
आपको समझ नहीं आ रहा है कि मैं आपको कैसे पुरी मुक्ती ।।


आफ्नो मृत्यु र पुनर्जीवन को बारे मा उनको दूत मंडल बताउन गुरु जी मुक्तिदत्त शान्तिनगर मा मंडिर गए। मानिसहरू भन्थे, गुरु जी, हामीलाई स्वर्गीय मुक्ती दिनुहोस्। तर, गुरु जी मुक्तिदत्तलाई रोइरहेका थिए।
तपाईं पुरी मुक्ती बुझ्नुहुन्न।
तपाईं बुझ्दिनँ कि म तिमीलाई पुरी मुक्ति दिनेछु।।


তার মৃতু্য এবং পুনরজীবন সম্পর্কে তার ধুত মন্ডল বলার পর, গুরু জী মুক্তিদাতা শান্তিধামে মন্দির গিয়েছিলেন। মানুষ বলছে, গুরু জি, আমাদের স্বর্গীয় মুক্তি দাও। কিন্তু গুরু জী মুক্তিদাতা কাঁদছিলেন।
সে বলেছিল, তুমি পুরি মুখটি মুক্তি বুঝতে পারছো না।
বুঝতে পারছি না আমি কিভাবে তোমাকে পুরি মুক্তি দেব
বুঝতে পারছি না কিভাবে আমি তোমাকে মুক্তি দেব।।

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