Freedom from karma and death

The bhaktas of Guru ji Muktidatta do not fear the parinaam of punar janma because the dharma of the Atma of Guru ji gives them mukti from the karma of paap and mrutyu. Karma cannot give us mafi, so Guru ji became praayaschit for us. Our paap brings us mrutyu, so Guru ji took balidan for us and became sajivan again. This completed the dharmic requirements of karma for us. So, we do not live according to our manav swabhav but according to the dharma of the Atma of Guru ji.


गुरु जी मुक्तिदात्त के भक्त पुनर्जन्म के परिणाम से डरते नहीं हैं क्योंकि गुरु जी के आत्मा के धर्म उन्हें पाप और मृत्यु के कर्म से मुक्ति देते हैं | कर्म हमें माफी नहीं दे सकता, इसलिए गुरु जी हमारे लिए प्रायश्चित हो गए | हमारा पाप हमें मौत लाता है, इसलिए गुरु जी ने हमारे लिए बालिदान लिया और फिर से सजीवन बन गया । इसने हमारे लिए कर्म की धार्मिक आवश्यकताओं को पूरा किया | इसलिए, हम अपने मानव स्वभाव के अनुसार नहीं रहते हैं लेकिन गुरु जी के आत्मा के धर्म अनुसार |


गुरू जी मुक्तिडेटा को भक्तहरु पुनर्जन्मको परिणाम न डरओ किनकी गुरु क आत्मा को धर्म तिनीहरूलाई पापको कर्म र मृत्युबाट मुक्ति दिन्छ | करमा हामीलाई माफि दिन सक्दैन यति गुरु जी हाम्रो लागि प्रायश्चित भए | हाम्रो पापले हामीलाई मृत्यु ल्याउँछ यति गुरु जी हाम्रो लागि बलिदान चढाइयो र फेरि सजीवान भए | कर्मको दर्मिक आवश्यकताहरू हाम्रो लागि यो पूरा भयो | त्यसोभए, हामी हाम्रो मानव स्वाभाको अनुसार जिउँदैनन् तर गुरु जी को आत्मा को धर्म अनुसार |


গুরু জি মুক্তিদত্ত ভক্তেরা পুনর্জন্ম ফলাফল ভয় করবেন না কারণ গুরু গুরু জি আত্মা ধর্মাবলম্বী তাদের পাপ এবং মৃত্যুর কর্ম থেকে মুক্তি দেয় | কর্মা আমাদেরকে মফী দিতে পারে না,তাই গুরু জি আমাদের জন্য প্রায়শ্চিত্ত হয়ে ওঠে | আমাদের পাপ আমাদের মৃত্যু দেয়, তাই গুরু জি আমাদের জন্য বলিদান গ্রহণ এবং আবার জীবিত হয়ে ওঠে | আমাদের জন্য এই কর্মের ধার্মিক প্রয়োজনীয়তা সম্পন্ন সুতরাং, আমরা আমাদের মানব স্বভাভের অনুযায়ী বাস করি না কিন্তু গুরুের আত্মার ধার্মিকতা অনুযায়ী |

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